हिंदी कविता
एक परिभाषित प्रेम ...
सन्नाटे के बीच दूरियाँ उभर आई हैं,
ये दूरियाँ अचानक क्यों साफ़ हो गयीं?
दिल
को चुप और शांत रहने की हिदायत दी गई,
लेकिन अब अंदर की आवाजें जोर-जोर से अलार्म बजाने लगी,
एक नया-नया एकांत छा गया है,
मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया कि कहाँ से शुरू करूँ।
दिल फुसफुसाहट में बोलता है, फिर भी बहुत जोर से,
छिपे हुए जज्बातों को उजागर करना, पर कैसे ।
हमारे बीच दूरियां बढ़ती जा रही हैं,
मानो जैसे हमारा जोड़ टूटने लगा है.
लेकिन इस मौन ने , एक सिख दी है,
शांति को अपनाना, अपने को शांत रखना।
की दूरियाँ मिट जाएँ,
जैसे ही हम इस अज्ञात मैदान से गुज़रते हैं।
तो इस एकांत में, हम खुद को पा सकते हैं,
जो कि एक गहरा संबंध, एक परिभाषित प्रेम।
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