· 2 घंटे
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एक जैसी होंगी
अधीर हृदय में
सभी बैठकें एक जैसी होंगी
सपने सजाये जहां
वहां सारी बातचीत एक जैसी होगी
आँखों से ही प्रियतम समझ जायेगा
दिल की हर धड़कन
खूबसूरत दिन वैसे ही रहेंगे
मनमोहक रातें वैसी ही होंगी
हवा की सरसराहट में
पत्तों की सरसराहट में
पक्षियों के गीतों में
आसमान के रंगों में
हर पल तुम्हारी बात करेगा
हर सांस तुम्हारे लिए तरसेगी
रात के सन्नाटे में
दिन की गर्मी में
तुम ही एकमात्र विचार रहोगे
एकमात्र इच्छा, एकमात्र सपना
मेरी आत्मा की गहराइयों में
मेरे अस्तित्व की गूँज में
सभी बैठकें एक जैसी होंगी
सारी बातचीत एक जैसी होगी
मेरे दिल के दायरे में
आप हमेशा रहेंगे.
बालकृष्ण डी ध्यानी
— उत्तराखंड की लगूली में खुश महसूस कर रहे हैं.PUBLICED BY

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