बालकृष्ण डी. ध्यानी

हिंदी कवितामेरा पौडी गढ़वाळ
हाड़ों के हृदय में,शांत सौंदर्य भगवती की भूमि है,पौडी गढ़वाळ ,जहाँ नदियाँ स्वतंत्र रूप से बहती हैं,और पेड़ प्राचीन कहानियाँ फुसफुसाते हैं।
चीड़ की सुगंध से हवा रमणीय है,और पहाड़ ऊंचे और गर्व से तने खड़े हैं,एक ऐसी जगह जहां समय ठहर सा जाता है,और प्रकृति की सुंदरता को ज़ोर-शोर से राज करने की अनुमति देती है।
पौडी गढ़वाळ  के  लोग,सभी  के साथ यंहा माधुर्य  से रहते हैं ,उनकी परंपराएँ और संस्कृति बहुत गहरी हैं,उनका एक ऐसा संबंध जो मजबूत और भव्य है.
घाटियाँ हरियाली से भरपूर हैं,और आकाश नीले रंग का एक कैनवास है,पौडी गढ़वाळ में,स्वर्ग सी बिखरी प्रकृति शुद्ध एवं सत्य है।
तो हम इस भूमि को लालच के लिए ना छोड़े ,आखरी समय तक वो रिश्ता ना तोड़े ,लौटा आना तो फिर आखिर में यंही  है ,पौडी गढ़वाळ तेरे सिवाय  और ना जाना कंही है 
बालकृष्ण डी ध्यानी

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— उत्तराखंड की लगूली में खुश महसूस कर रहे हैं.
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उत्तराखंड की लगूली